मार्केट में मिल रहा नकली चार्जर और एक्सेसरीज, पहचानने के लिए फॉलों करे स्टेप
इंडिया में स्मार्टफोन और एक्सेसरीज का मार्केट लगातार बढ़ रहा है। यहां पर फेक गैजेट की भी बड़ी रेंज मौजूद है।
गैजेट डेस्क। इंडिया में स्मार्टफोन और एक्सेसरीज का मार्केट लगातार बढ़ रहा है। यहां पर फेक गैजेट की भी बड़ी रेंज मौजूद है। इन्हें देखकर नकली होने का का पता लगाना भी मुश्किल है। ऐसे में यदि आप महंगा स्मार्टफोन या गैजेट खरीद रहे हैं और वो फेक मॉडल हुआ, तब बाद में पछताना पड़ेगा। ऐसे में आपको नकली और असली की पहचान पता होना चाहिए।
फेक एक्सेसरीज
नकली प्रोडक्ट को फेक और डुप्लिकेट भी कहा जाता है। ये देखने में हूबहू रियल या ऑरिजनल की तरह होते हैं। फेक प्रोडक्ट को बनाने में इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि ये ऑरिजनल की तरह दिखे। इसके लिए बॉडी, कलर, लोगो हर चीज मेहनत की जाती है। यानी इन्हें देखने पर इस बात का पता लगाना मुश्किल होता है कि ये असली नहीं है। हालांकि, जब इन्हें इस्तेमाल में लाया जाता है तब पोल खुल जाती है।
सैमसंग चार्जर
भारत में सैमसंग स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले कई यूजर्स हैं। ऐसे में उन्हें कंपनी के चार्जर की जरूरत होती है, लेकिन मार्केट में इसका फेक चार्जर भी मिल रहा है, जो आपको फोन को खराब कर सकता है। ऊपर दी गई फोटो में जो कॉपी चार्जर है उसे हमने रेड कलर से मार्क किया है। फेक चार्जर में कंपनी के नाम में इस्तेमाल टेक्स्ट अलग है। इसके साथ, इसमें एडिशनल A+ लिखा हुआ है। फेक चार्जर पर मेड इन चाइना लिखा है। यानी आप इन चीजों पर गौर करते हैं तो फेक खरीदने से बच सकते हैं।
स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लगभग हर यूजर्स हो USB केबल का जरूरत होती है। अक्सर लोग फोन को चार्ज करने, डाटा ट्रांसफर करने के लिए इस केबल का इस्तेमाल एक-दूसरे से लेकर भी करते हैं। हालांकि, आप USB केबल ले रहे हैं तो इस बात को जरूर चेक करें कि वो रियल है, क्योंकि ये आपको फोन को नुकसान पहुंच सकती है। ऊपर दिखाए गई फोटो में दाएं तरफ फेक केबल है। इसमें USB कनेक्टर रियल से ज्यादा लंबा है, USB का लोगो कलर ब्लैक है।
USB पोर्ट
माइक्रो पोर्ट की तरह USB पोर्ट को चेक करना भी जरूरी होता है, क्योंकि अक्सर इस पोर्ट को इस्तेमाल कम्प्यूटर, लैपटॉप, चार्जर में किया जाता है। ऊपर जो फोटो में उसमें बाएं तरफ कॉपी USB पोर्ट है। फेक पोर्ट के ऊपर कोई नंबर या अन्य टेक्स्ट लिखा हो सकता है। साथ ही, केबल पर प्रिंट USB लोगो का कलर भी अलग हो सकता है। ऐसे में इसकी पहचान ध्यान से करना चाहिए।
सैमसंग चार्जर के टैक्स्ट
मार्केट में सैमसंग के फेक प्रोडक्ट की पहचान उस पर लिखे टेक्स्ट से आसानी से की जा सकता है। दरअसल, फेक प्रोडक्ट पर यूं तो सैमसंग की स्टाइल कॉपी की गई है, लेकिन इसके बाद भी इसके टेक्स्ट अलग हैं। ऊपर जो फोटो है उसमें सभी टेक्स्ट एक जैसे हैं, लेकिन जब आप A को गौर से देखेंगे तो ये कुछ अलग है। कॉपी चार्जर में A ऊपर की तरफ मोटा नजर आ रहा है।
चार्जर का USB पोर्ट
फोटो में देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि सैमसंग चार्जर के रियल और फेक USB पोर्ट में कितना अंतर है। दोनों का डिजाइन पूरी तरह अलग है। हालांकि, इन्हें अलग-अलग देखा जाए तो इस बात का पता लगाना मुश्किल होगा कि ये नकली है। साथ ही, अंदर की तरफ मौजूद फीमेल USB कनेक्टर भी अलग हैं।
सैमसंग चार्जर पिन
सैमसंग के फेक चार्जर में पिन भी अलग हैं। ऑरिजनल चार्जर की पिन में नीचे की तरफ से एक छोटी से लेयर बनी हुई है, जबकि फेक में ऐसा नहीं है। हालांकि, इसके डिजाइन को देखकर कोई इसे फेक चार्जर नहीं बोल सकता।






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