ज्यादातर लोग ऐसे ही सेट करते हैं कार के साइड मिरर, जिससे हो जाते हैं एक्सीडेंट
कार की ड्राइविंग के दौरान कई बातें ध्यान रखना होती हैं, क्योंकि ड्राइविंग में हुई एक गलती से बड़ा हादसा हो सकता है।
कार की ड्राइविंग के दौरान कई छोटी-छोटी बातें ध्यान रखना होती हैं। क्योंकि ड्राइविंग में हुई एक गलती से बड़ा हादसा हो सकता है। खाली सड़क और ट्रैफिक में कार की स्पीड कितनी होनी चाहिए और दूसरी कार से कितनी डिस्टेंस हो, ये बात भी ड्राइविंग के दौरान अहम होती हैं। वैसे, ड्राइविंग से जुड़ी एक गलती ज्यादातर लोग करते हैं। वो होती है कार की मिरर सेट करने की।
मिरर सेटिंग से होते हैं कई हादसे
- ड्राइवर हमेशा कार के 3 मिरर की मदद से पीछे वाले ऑब्जेक्ट को देखता है।
- पहला मिरर कार के अंदर सेंटर में होता है। वहीं, दो मिरर कारे के बाहर लेफ्ट और राइट गेट पर होते हैं।
- इन मिरर में कार के पीछे चलने वाली या ओवरटेक करने वाली सभी गाड़ियां नजर आती हैं।
- ज्यादातर मिरर की सेटिंग ऐसी होती है जिसमें एक समय पीछे का ऑब्जेक्ट नजर नहीं आता।
- इस कंडीशन को ब्लाइंड स्पॉट कहते हैं। इसी के चलते कई बार एक्सीडेंट हो जाता है।
क्या है ब्लाइंड स्पॉट
- जब कोई कार, बाइक या अन्य गाड़ी आपकी कार को पीछे से ओवरटेक करती है, तब वो सेंटर मिरर में दिखाई देती है।
- लेकिन, जैसे ही वो आपकी कार के बराबर आ जाती है तब साइड मिरर में पल भर के लिए नजर नहीं आती।
- इसी स्थिति को ब्लाइंड स्पॉट कहते हैं। अक्सर जब इस स्थित में पीछे वाली गाड़ी नजर नहीं आती, जिसके चलते कई बार एक्सीडेंट भी हो जाता है।
ऐसे करें मिरर की सेटिंग
- ब्लाइंड स्पॉट से बचने के लिए अपनी कार के तीनों मिरर की सेटिंग पूरी तरह सही होने बहुत जरूरी है।
- सेंटर मिरर को हमेशा इस तरह सेट करें कि उसमें कार का बैक पार्ट बीचों-बीच नजर आए।
- साइड मिरर की सेटिंग इस तरह होना चाहिए कि जब कोई गाड़ी ओवरटेक करे तब जैसे ही वो सेंटर मिरर में दिखना बंद हो, साइड मिरर में नजर आने लगे।
- ज्यादातर लोग मिरर को इस तरह सेट करते हैं कि कार का बैक पार्ट उसमें दिखाई देता है।
- यही वजह है कि जब कार के बराबर चलने वाली गाड़ी उसमें नजर नहीं आती।
- यदि कोई गाड़ी आपकी कार के पीछे है तब वो सेंटर मिरर में नजर आएगी, उसे साइड मिरर में देखने की जरूरत नहीं है।
- मिरर बाहर की तरफ खुला होगा चो वो गाड़ी जैसे ही आपको ओवरटेक करेगी साइड मिरर में नजर आ जाएगी।
कार की ड्राइविंग के दौरान कई बातें ध्यान रखना होती हैं, क्योंकि ड्राइविंग में हुई एक गलती से बड़ा हादसा हो सकता है।
कार की ड्राइविंग के दौरान कई छोटी-छोटी बातें ध्यान रखना होती हैं। क्योंकि ड्राइविंग में हुई एक गलती से बड़ा हादसा हो सकता है। खाली सड़क और ट्रैफिक में कार की स्पीड कितनी होनी चाहिए और दूसरी कार से कितनी डिस्टेंस हो, ये बात भी ड्राइविंग के दौरान अहम होती हैं। वैसे, ड्राइविंग से जुड़ी एक गलती ज्यादातर लोग करते हैं। वो होती है कार की मिरर सेट करने की।
मिरर सेटिंग से होते हैं कई हादसे
- ड्राइवर हमेशा कार के 3 मिरर की मदद से पीछे वाले ऑब्जेक्ट को देखता है।
- पहला मिरर कार के अंदर सेंटर में होता है। वहीं, दो मिरर कारे के बाहर लेफ्ट और राइट गेट पर होते हैं।
- इन मिरर में कार के पीछे चलने वाली या ओवरटेक करने वाली सभी गाड़ियां नजर आती हैं।
- ज्यादातर मिरर की सेटिंग ऐसी होती है जिसमें एक समय पीछे का ऑब्जेक्ट नजर नहीं आता।
- इस कंडीशन को ब्लाइंड स्पॉट कहते हैं। इसी के चलते कई बार एक्सीडेंट हो जाता है।
क्या है ब्लाइंड स्पॉट
- जब कोई कार, बाइक या अन्य गाड़ी आपकी कार को पीछे से ओवरटेक करती है, तब वो सेंटर मिरर में दिखाई देती है।
- लेकिन, जैसे ही वो आपकी कार के बराबर आ जाती है तब साइड मिरर में पल भर के लिए नजर नहीं आती।
- इसी स्थिति को ब्लाइंड स्पॉट कहते हैं। अक्सर जब इस स्थित में पीछे वाली गाड़ी नजर नहीं आती, जिसके चलते कई बार एक्सीडेंट भी हो जाता है।
ऐसे करें मिरर की सेटिंग
- ब्लाइंड स्पॉट से बचने के लिए अपनी कार के तीनों मिरर की सेटिंग पूरी तरह सही होने बहुत जरूरी है।
- सेंटर मिरर को हमेशा इस तरह सेट करें कि उसमें कार का बैक पार्ट बीचों-बीच नजर आए।
- साइड मिरर की सेटिंग इस तरह होना चाहिए कि जब कोई गाड़ी ओवरटेक करे तब जैसे ही वो सेंटर मिरर में दिखना बंद हो, साइड मिरर में नजर आने लगे।
- ज्यादातर लोग मिरर को इस तरह सेट करते हैं कि कार का बैक पार्ट उसमें दिखाई देता है।
- यही वजह है कि जब कार के बराबर चलने वाली गाड़ी उसमें नजर नहीं आती।
- यदि कोई गाड़ी आपकी कार के पीछे है तब वो सेंटर मिरर में नजर आएगी, उसे साइड मिरर में देखने की जरूरत नहीं है।
- मिरर बाहर की तरफ खुला होगा चो वो गाड़ी जैसे ही आपको ओवरटेक करेगी साइड मिरर में नजर आ जाएगी।




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